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भगवद गीता 12.13

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च। निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥

जो किसी भी प्राणी से घृणा नहीं करता, जो सबके प्रति मित्रवत और दयालु है, जो ममता और अहंकार से मुक्त है, सुख-दुख में समान है, और क्षमाशील है...
  • compassion
  • anger
  • forgiveness
  • relationships

यह श्लोक किस बारे में है

यह श्लोक भगवद गीता के अध्याय 12 से है।

चिंतन

तुम्हें हर किसी से प्यार करना ज़रूरी नहीं है। बस उनका बुरा चाहना बंद कर सकते हो।

एक छोटा अभ्यास

किसी ऐसे इंसान के बारे में सोचो जिससे तुम्हें मन में कड़वाहट है। आज चुपचाप उसके लिए एक अच्छी बात की कामना करो।

अध्याय 12

भक्ति योग

कृष्ण को जो प्रिय है, उसके लक्षण: मित्रता, समता, भय से मुक्ति, क्षमा, और एक शांत मन।

ये मन के सवाल जिनसे यह श्लोक जुड़ता है

ऐसे सवाल जो असली लोग मन में उठाते हैं, और जिन पर यह श्लोक कुछ कहता है।

इस श्लोक के साथ थोड़ी देर और ठहरिए।

धर्म से पूछें कि यह श्लोक आपके जीवन में कैसे उतर सकता है, और एक शांत, श्लोक-आधारित चिंतन प्राप्त करें।

12.13 पर धर्म से पूछें